Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

तेरह साल का बंटी दौड़ा-दौड़ा अपने घर पर आया और अपने पिता जी से बोला, कि मूझे कुछ पैसों की जरुरत है नई किताबें खरीदनी है, इस पर पिता जी झल्लाते हुये बोले कि “पैसै क्या पेड़ पर लगते हैैं जो जब चाहे तोड़ लेें” वैसे भी क्या करेगा पढ़ लिख कर तूझे भैंस ही तो चराना है। यही बात बंटी के दिमाग में घर कर जाती है और फिर क्या होता है यह जानने के लिए बने रहें हमारे साथ और पढ़ें यह आर्टिकल >> “Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़“।

बंटी के पिता गिरधारी लाल गांव के एक छोटे से किसान हैं, उनके पास दो भैंसे भी है जिनका दुध बेचकर उनके परिवार का खर्च चलता है वह भी क्या करते जब उनके पास पैसे नहीं थे तो कहाँ से देते उनके इस फटकार ने बंटी को निराश कर दिया और वह घर से बाहर की ओर जाते हुए कुछ सोचने लगता है।

बंटी के दिमाग में एक बात कौंधने लगी, कि पैसे पेड़ पर नहीं लगते और उसी दिन से उसने अपने दिमाग में एक कल्पना किया और वह था “पैसों का पेड़”। उसने कहा कि मै पैसों का पेड़ लगाऊंगा उसकी यह बात सुनकर लोग हँसने लगते हैं और उसका मजाक उड़ाते हैं कि कहीं पैसों का पेड़ भी होता है क्या लेकिन बंटी ने इस बात को बहुत ही गंभीरता से ले लिया था।

दोस्तों, कल्पना में वह शक्ति होती है, जिसे हकीकत में बदला जा सकता है लेकिन कैसे इसी के बारे में हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि कैसे बंटी ने “पैसों का पेड़” की कल्पना को हकीकत में बदला और एक दिन एक बहुत बड़ा उद्योगपति बन गया, तो आइये अब आगे बढ़ते हैं और इस कहानी की गहराई में जाते हैं।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

बंटी का बचपन :

बंटी का जन्म एक गरीब किसान के यहां हुआ था, उसके पिता गिरधारी लाल एक छोटे किसान थे, उनके पास दो भैंसें थी जिनसे निकले हुए दूध को बेचकर जो पैसे मिलते थे उससे परिवार का जीवन यापन होता था। बंटी एक महत्वकांक्षी लड़का था वह पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनना चाहता था लेकिन गरीबी और लाचारी के कारण वह आठवीं से ज्यादा नहीं पढ़ पाया।

बंटी का एक दोस्त भी था जिसका नाम शंटी था, जो उस गाँव के मास्टर जी का बेटा था उसके घर की हालत बंटी के घर के मुकाबले काफी बेहतर थी। क्योंकि शंटी के पिता जी के पास अच्छी-खासी जमीन थी साथ में उनकी अच्छी-खासी तनख्वाह थी और पुरे गाँव में मास्टर जी की इज़्ज़त भी थी।

बंटी के पिता जी की जिंदगी उनके भैंसों के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती थी, दिन भर उनको चराना, उनकी सेवा करना और उनसे दूध निकालकर बेचना यही उनकी जिंदगी थी। इससे ज्यादा उन्होंने कभी कुछ सोचा ही नहीं और जाहिर सी बात है कि जो आगे की नहीं सोचता वह कभी आगे बढ़ भी नहीं पाता है जबकि बंटी अपने जीवन में कुछ बड़ा करने के बारे में सोच रहा था।

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बंटी का सपना :

एक दिन बंटी और शंटी गाँवं के तालाब के किनारे बैठे हुए थे, बंटी शांत और खामोश मुद्रा में कुछ सोच रहा था यह देख शंटी ने उससे पूछा…..? क्या बात है दोस्त बहुत खामोश बैठे हो सब ठीक तो है, इस पर बंटी ने कहा यार मै “पैसों का पेड़” लगाना चाहता हूँ, इस पर शंटी बहुत जोर से हँसता है और कहता है तू पागल हो गया है कहीं “पैसों का भी पेड़” होता है क्या।

दोस्तों, इस दुनियाँ में जब भी कोई छोटा आदमी कोई बड़ी बात करता है तो लोग उसका मजाक ही उड़ाते हैं इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। अब-जब बंटी “पैसों के पेड़” के बारे में किसी से भी कुछ कहता तो लोग उसे पागल कहने लगते।

पुरे गाँवं में यह बात आग की तरह फ़ैल गयी, कि गिरधारी लाल का लड़का बंटी पागल हो गया है, वह तो “पैसों का पेड़” लगाने की बात कर रहा है। इस बात से गिरधारी लाल भी काफी चिंतित हो जाते हैं और बंटी को भला-बुरा कहने लगते हैं लेकिन बंटी के दिमाग में तो “पैसों का पेड़” का बीज लग चुका था और वह भविष्य में खुद को “पैसों के पेड़” का बगीचे का मालिक के रूप में देख रहा था।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

बंटी की प्रतिज्ञा :

एक दिन उसका दोस्त शंटी दौड़ा – दौड़ा उसके पास आया, और बोला कि बंटी मेरे पिता जी मुझे पढ़ाई के लिए शहर भेज रहे हैं, वह चाहते हैं कि मै पढ़-लिख कर कोई अच्छी नौकरी करूँ। यार बंटी तेरे किश्मत में तो पढ़ाई-लिखाई है नहीं आखिर तुझे तो भैंस ही चराना है ( शंटी ने बंटी का मजाक उड़ाते हुए कहा ) और जाने लगा इस पर बंटी ने शंटी को रोकते हुए कहा कि ऐ मेरे दोस्त आज तू मेरी गरीबी का मजाक उड़ा रहा है लेकिन आज मै एक प्रतिज्ञा करता हूँ कि जब तक मै “पैसों का पेड़” नहीं लगा लेता तब तक मै चैन की साँस नहीं लूंगा।

अब बंटी जब किसी से भी मिलता, तो उससे यही बात कहता कि मै एक दिन “पैसों का पेड़” लगाऊंगा और जब लोग उसका मजाक उड़ाते तो वह उन सबसे वही कहता जो शंटी से कहा था कि जब तक मै “पैसों का पेड़” नहीं लगा लेता तब तक मै चैन की साँस नहीं लूंगा।

दोस्तों, यह एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है, कि जब हम किसी चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं तब हम पर उस काम को करने का दबाव बन जाता है क्योंकि यह हमारे स्वाभिमान से भी तो जुड़ जाता है जब बंटी ने लोगों की चुनौती को स्वीकार किया तो उसके रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो गया और वह अपने सपने को सच करने के बारे में गंभीरता से विचार करने लगा।

बंटी की बड़ी सोच :

बंटी ने जो सपना देखा था वह इतना आसान नहीं था, लेकिन अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो कुछ मुश्किल भी नहीं होता है। अब बंटी ने सोचा कि ऐसा कौन सा काम किया जाए जो एक दिन “पैसों का पेड़” बन जाए क्योंकि उसके घर की माली हालत ऐसा नहीं है कि वह आगे पढ़ाई कर सके और कोई अच्छी नौकरी पा सके और कोई व्यापार करने के लिए पैसों की जरुरत होती है जो उसके पिता के पास है नहीं, बहुत कुछ सोचने के बाद उसके दिमाग में एक आईडिया आया कि क्यों ना अपने पिता जी के दूध के काम को ही कुछ बेहतर तरीके से किया जाए और उसने फैसला किया कि वह इसी काम को आगे बढ़ाएगा।

बंटी ने अपने पिता जी से कहा, कि पिता जी आज से आप भैंसो को पालने, उन्हें चराने और दूध निकालने का काम करोगे लेकिन मै उस दूध को बेचने का काम करूँगा इस पर गिरधारी लाल कहते हैं कि बेटा वो तो मै कर ही रहा हूँ तू पास के शहर में जाकर कोई छोटी-मोटी नौकरी ढूंढ ले क्योंकि सिर्फ दूध के काम से हमारे घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता है दो पैसे तू भी कमायेगा तो घर चलाने में आसानी हो जायेगी।

बंटी ने अपने पिता की बात तो सुनी पर उसपे कोई गौर नहीं किया, क्योंकि उसके दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था और वह था “पैसों का पेड़” और उस पेड़ से पैसे पाने के लिए जाहिर सी बात है कि किसी लक्ष्य के बीज को बोना पड़ेगा और वह बीज बंटी के दिमाग में तो बोया जा चूका था लेकिन उसको असली जामा पहनाना बाकी था क्योंकि सिर्फ सोचने से ही कुछ नहीं होता बल्कि सोच को कार्यवाही में बदलना होता है और कार्यवाही भी सही तरीके से होनी चाहिए ताकि उसका कोई सकारात्मक नतीजा निकल सके।

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अवसर की पहचान :

एक दिन बंटी किसी काम से पास के शहर में गया हुआ था, अचानक उसकी निगाह एक दुकान पर पड़ी जिस पर लिखा हुआ था चौधरी डेयरी, उस दुकान पर दूध, दही, घी, पनीर आदि की विक्री हो रही थी बंटी के दिमाग में पता नहीं क्या सुझा वह काफी देर तक उस दुकान के सामने खड़ा रहा और वहाँ पर होने वाले हर गतिविधि को ध्यान से देखता रहा और जब वह वापिस अपने घर की ओर आ रहा था तो उसके दिमाग में एक ही बात चल रहा था कि कितनी भीड़ थी उस दुकान में, कोई दूध खरीद रहा था तो कोई दही तो कोई पनीर, दुकान के मालिक को नोट गिनने से फुर्सत ही नहीं थी, ऐसा लग रहा था जैसे वहाँ पैसों की बारिश हो रही हो।

दोस्तों, इंसान की जिंदगी में अवसरों का आना-जाना लगा रहता लेकिन अफ़सोस की बात कि वह उसे पहचान नहीं पाता और वह अवसर भी किस प्रकार के होते हैं आइये जानते हैं,

  • अपनों द्वारा ठुकराया जाना।
  • घर और परिवार का मिलता ताना।
  • दुनियाँ और समाज में कम आँका जाना।
  • दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा मजाक उड़ाया जाना।
  • आपकी जिंदगी में किसी अमीर का आना।

दोस्तों, जिंदगी हमें धक्का देती है कुछ एहसास कराने के लिए, खुद को खाश बनाने के लिए, अपने आप को ऊपर उठाने के लिए लेकिन अफ़सोस की बात कि हम धक्के के मतलब को समझ नहीं पाते और बेशर्म, बेहया बनकर जीवन जी रहे होते हैं जबकि उन घटनाओं को अगर हम बारीकी से समझें तो वह ही वो पल होते हैं जो हमारे जीवन को एक नया मोड़ देते हैं जैसे बंटी के साथ हुआ।

  • गिरधारी लाल द्वारा बंटी से झल्लाकर कहना कि मेरे पास कोई पैसे के पेड़ थोड़े ही हैं।
  • गाँवं वालों द्वारा बंटी का मजाक उड़ाया जाना कि कहीं पैसों के भी पेड़ होते हैं क्या।
  • समाज द्वारा बंटी को पागल करार देना कि यह पैसों का पेड़ लगाएगा।
  • शंटी द्वारा बंटी को ताना मारा जाना कि तुम्हे तो आखिर भैंस ही चराना है।
  • शहर में अचानक बंटी के सामने चौधरी डेयरी दिख जाना और उसका रुक जाना।

दोस्तों, यह छोटी – छोटी बातें हमारे जीवन में कई बार बहुत ही मायने रखने वाली होती हैं अगर हम समझें तो वर्ना तो बड़ी-बड़ी घटनाएं भी हमारे सामने से होकर गुजर जाती हैं और हम अपनी मस्ती में उन्हें नज़र अंदाज़ कर देते हैं और लोगों से कहते फिरते रहते हैं कि हमें तो कभी कोई अवसर ही नहीं मिला हमारी तो किश्मत ही ख़राब थी नहीं तो हम भी अपने जीवन में तरक्की कर जाते।

इधर बंटी जब से शहर से आया है, उसके दिमाग में कुछ पिक्चर चलने लगे हैं जैसे- शहर के बाजार में एक दुकान खुल चुकी है जिसका नाम बंटी डेयरी है जिसमे दूध, दही, घी, पनीर आदि की बिक्री हो रही है ग्राहकों की लाइन लगी है बंटी को नोट गिनने से फुर्सत नहीं है।

कई दिनों तक ख़याली दुनियाँ में रहने के बाद, एक दिन बंटी ने अपने पिता जी से बात की कि वह शहर के बाज़ार में एक दुकान खोलना चाहता है इस पर पिता जी ने पूछा कि किस तरह की दुकान तब उसने अपने ख़याली दुनियाँ वाली बात पिता जी को बतायी, थोड़ी देर तक आना-कानी करने के बाद आखिर गिरधारी लाल मान गए और इधर-उधर से कुछ पैसों का इंतज़ाम करके बंटी को देते हैं और बंटी शहर के बाज़ार में एक छोटी सी दुकान किराए पर लेकर उसमे छोटी सी डेयरी खोल देते हैं जिसमे शुरुआत में सिर्फ दूध और दही की बिक्री की जाती है।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

बंटी का संघर्षकाल :

बंटी ने शहर में दुकान खोल तो ली, लेकिन उसने जैसा सोचा था वैसा बिलकुल भी नहीं हुआ। उसने सोचा था कि दुकान खोलते ही ग्राहकों की लाइन लग जायेगी और वह बहुत तेजी से पैसे कमाने लगेगा लेकिन उसके दुकान में बहुत कम ग्राहक आते थे।

अब बंटी ने सोचना शुरू किया, कि ऐसा क्या किया जाए कि मेरे दुकान में ग्राहकों कि इंट्री बढ़े, बहुत सोच समझ कर उसने एक स्कीम निकाली कि जो भी ग्राहक उसके दुकान से 1 लीटर दूध खरीदेगा उसको एक पाव दूध बिलकुल मुक्त दिया जाएगा।

ऐसा करने से बंटी के मुनाफे में तो कमी आयी, लेकिन उसके दुकान में ग्राहकों की इंट्री बढ़ने लगी। अब बंटी ने कुछ और दिमाग लगाया कि जो दूध के मुनाफे की कमी है उसे कैसे और किस तरह से पूरा किया जाए इसका समाधान भी उसे मिल गया अब उसने फैसला किया कि वह अपने दुकान में और अधिक वेराइटी रखेगा जैसे-घी, पनीर, खोया, छाछ, लस्सी, आदि और जैसे ही उसने ऐसा किया वाकई में उसके दूध के मुनाफे की कमी तो पूरी हुई ही साथ में और ज्यादा मुनाफा भी होने लगा।

अब बंटी की दुकान चल पड़ी थी, गिरधारी लाल काफी खुश थे कि उनके बेटे ने जो फैसला लिया था वह बिलकुल सही था, खुश तो बंटी भी था लेकिन उतना नहीं जितना कि उसके पिता गिरधारी लाल थे क्योंकि बंटी के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था और वह था “पैसों का पेड़” जिसके लिए अभी उसे लम्बी दूरी तय करनी थी।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

समय बीतता गया, लगभग 5 साल बाद एक घटना घटती है और वह यह कि बंटी के दुकान के मालिक ने बंटी को दुकान खाली करने के लिए कहा और यह सुनते ही बंटी के पैरों तले जमीन खिसक गयी कि यह क्या अभी तो पाँव जमने शुरू हुए थे, कितनी मुसीबतों को झेलते हुए मैंने यह दुकान चलाई और अब इसे खाली करना पड़ेगा।

हालाँकि,अब तक बंटी ने अच्छे-खासे पैसे उस दुकान से कमा लिए थे इसलिए उसने फैसला किया कि वह अब अपनी दुकान खरीदेगा और उसने ऐसा ही किया शहर के बीचों-बीच चौधरी डेयरी के सामने वाली दुकान बिक रही थी उसको खरीदने के लिए उसने बैंक से लोन लिया और उस दुकान को खरीद लिया और वह दुकान बनती को रास भी आयी।

आने वाले कुछ सालों में ही, बंटी की दूकान इतनी चलने लगी कि अब बंटी का दिमाग भी पहले से ज्यादा चलने लगा। अब बंटी ने अपने सपनों को पंख देने का फैसला किया अपनी उस दुकान पर अपने पिता गिरधारी लाल को बैठाया और खुद को फ्री किया ताकि कुछ बड़ा करने के लिए कुछ बड़ा कदम उठाया जाए।

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बंटी का व्यापारिक विस्तार :

बंटी को व्यापार की दुनियाँ में आये 5 साल हो गए थे, इतने दिनों में उसने बहुत सारे उतार-चढ़ाव देख लिए थे साथ ही एक अच्छा सा दुकान भी उसने तैयार कर लिया था लेकिन अभी वह इससे संतुष्ट नहीं था क्योंकि उसका सपना तो कुछ और था उसे तो “पैसों का पेड़” लगाना था और उसके लिए अभी उसे बहुत ही लम्बा सफर तय करना था।

इस 5 साल के सफर में उसे यह भी समझ में आ गया था, कि सिर्फ एक दुकान से वह अपना सपना पूरा नहीं कर सकता था इसलिए उसने आगे की रणनीति बनाते हुए एक प्लान बनाया, कुछ ही दिनों में गर्मियों का मौसम आने वाला था और गर्मियों में ठंढे पेय पदार्थों की खूब बिक्री होती है जैसे-लस्सी, कोल्ड ड्रिंक, दूध की बोतल आदि इनमे सबसे सही उसे दूध की बोतल का काम समझ में आया क्योंकि इस लाइन का वह मास्टर बन चूका था।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

बंटी एक दिन थोक बाजार गया, और वहाँ से 1000 बोतल खरीदकर लाया और साथ में उन्हें पैक करने की मशीन और कुछ फ्लेवर जिससे वह दूध को अलग-अलग टेस्ट दे सके। साथ ही कुछ नए स्टाफ की भर्ती भी की जो दूध की बोतल तैयार करना जानते थे और अपने दुकान के पीछे के हिस्से में ही उसने थोड़ी सी जगह में बोतल बंद दूध तैयार करना शुरू कर दिया। शुरुआत में बंटी ने उन बोतलों में कोल्ड कॉफ़ी, बादाम मिल्क, वनीला मिल्क, स्ट्रॉबेरी मिल्क, चॉकलेट मिल्क, फ्लेवर तैयार करवाया और अपने दुकान के फ्रीज़ में रखवा दिया और दुकान के बाहर एक बड़ा सा बोर्ड लगवा दिया कि “हमारे यहाँ दूध की ठंडी बोतलें भी मिलती है” साथ में उन फ्लेवरों का नाम भी लिखवा दिया, शुरुआत में तो कोई अच्छा नतीजा नहीं निकला लेकिन धीरे-धीरे बिक्री बढ़ने लगी।

उस गर्मी के सीजन में ही बंटी को यह काम काफी हद तक समझ में आ गया था, साथ में मुनाफा भी अच्छा हो गया था। अभी तक बंटी ने सिर्फ यह सोचा था की दूध की बोतलों का काम सिर्फ गर्मियों में ही चलेगा लेकिन ऐसा नहीं था उसके बाद भी लोगों में इसकी डिमांड थी वह बात अलग है कि दूसरे मौसम में उसकी बिक्री आधी रह गयी लेकिन डिमांड तो थी ही। एक दिन में जहाँ 500 बोतलें बिकती थी अब 250 बोतलें बिकती हैं लेकिन बिकती तो हैं।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

बंटी का औद्योगीकरण :

अब बंटी के दिमाग का ढक्कन पूरी तरह खुल चूका था, उसने एक प्रयोग किया उसके पास 1000 बोतलें थी उसके दुकान पर 500 बोतलें रोज़ाना बिक जाती थी लेकिन अब सिर्फ 250 ही रोज़ाना बिक पाती हैं बाकी की बोतलों को उसने बाजार में दुकान-दुकान सप्लाई करने की सोची और उसके लिए बोतलों की क्रेट मंगवाई एक रिक्शे वाले से संपर्क किया और सप्लाई शुरू कर दी शुरुआत में बंटी को मुँह की खानी पड़ी उसकी बोतलें दुकानदार नहीं खरीदते थे क्योंकि वह कोई ब्रांड नहीं था।

अब बंटी ने कुछ सोचा-बिचारा,और फिर से दिमाग लगाना शुरू किया उसके बाद उसने रजिस्ट्रेशन नम्बर लिया, एक नाम सोचा, “बंटी मिल्क” और अपने दूध के बोतलों पर प्रॉपर तरीके से स्टीकर लगवाया, उसके बाद एक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनायी कि हम दुकानदार को बोतलों की क्रेट देंगे दुकानदार माल बेचकर हमें पैसा देगा एक पेमेंट उधर रहेगी बाकी की पेमेंट नगद होगी और यह रणनीति कारगर सिद्ध हुई।

देखते ही देखते, शहर के हर हलवाई की दुकान, ठन्डे पेय की दुकान, आदि पर बंटी की बोतलें धड़ल्ले से बिकने लगीं अब बंटी ने और बड़ा रिस्क लिया उसने एक ट्रक ख़रीदा और दूसरे शहरों में भी सप्लाई देनी शुरू कर दी इस तरह बंटी का व्यापार अब बहुत बड़ा हो चुका था। अब तो बंटी ने शहर के बाहर एक बहुत ही बड़ी फैक्ट्री लगा ली थी।

अब बंटी एक और बड़ी फैक्ट्री लगाने जा रहा था, और उसके लिए उसे बहुत सारे कर्मचारियों की भी जरुरत थी इसलिए उसकी कंपनी ने अखबार में इसका विज्ञापन दिया और दिए हुए तारीख को लोग इंटरव्यू देने के लिए पहुंचे बंटी खुद ही लोगों की इंटरव्यू ले रहा था तभी एक आदमी आता है जो मैनेजर की नौकरी के लिए इंटरव्यू देने आया था।

बंटी के सामने मैनेजर के पोस्ट के लिए एक आवेदक आता है, और पूछता है कि “May i come in sir” और जैसे ही बंटी कहता है Come in वहाँ का नज़ारा ही बदल जाता है क्योंकि सामने वाला व्यक्ति कोई और नहीं बंटी के बचपन का दोस्त शंटी था।

बंटी ने शंटी को अपने बगल में बैठाया, और उससे उसका हाल-चाल पुछा इस पर शंटी ने बताया कि इसी साल उसके MBA की पढ़ाई पूरी हुई है नौकरी की तलाश कर रहा था इसी बीच इस कंपनी का विज्ञापन पढ़ा तो इंटरव्यू देने के लिए आ गया लेकिन बंटी तुम यहाँ कैसे इस पर बंटी ने जबाब दिया कि मै इस कंपनी का मालिक हूँ इस पर शंटी दंग रह गया फिर जब बंटी ने अपने कामयाबी की सारी कहानी सुनाई तो शंटी ने कहा मान गया दोस्त वाकई में तुमने “पैसों का पेड़” लगा ही लिया जब तुम अपने सपने के बारे में लोगों से कहते थे तो हम सभी तुम्हारा मज़ाक उड़ाते थे तुम जीत गए बंटी मै तुम्हारे इस हौसले को सलाम करता हूँ और तुमसे कुछ सीखने की उम्मीद भी रखता हूँ यह कहकर शंटी ने बंटी से कहा अच्छा दोस्त अब मै चलता हूँ इस पर बंटी ने पुछा कहाँ शंटी बोला नौकरी की तलाश में बंटी बोला अब तुम्हें कहीं नहीं जाना है आज से तुम हमारे कंपनी के मैनेजर हो उसके बाद बंटी ने शंटी को अपने कंपनी में मैनेजर की नौकरी दे दी। अब दोनों दोस्त नहीं बल्कि मालिक और नौकर हैं वो बात अलग है कि दोस्त तो वे अभी भी हैं लेकिन मालिक और नौकर का फर्क तो रहेगा ही।

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बंटी के पैसों का पेड़ :

इस कहानी में “पैसों का पेड़” का मतलब है, एक ऐसा साम्राज्य जो खड़ा करने में सालों-साल लगते हैं लेकिन जब वह खड़ा हो जाता है तब आने वाली कई पीढ़ियाँ उससे फल तो प्राप्त करती ही हैं साथ में एक बेहतर माहौल भी हासिल करती हैं और उसके छाये में सुरक्षित भी महसूस करती हैं।

बंटी के पिता गिरधारी लाल एक गरीब किसान थे, उनकी सोच भी गरीब ही थी इसलिए वह जिंदगी भर गरीब ही बने रहे लेकिन बंटी ने उस गरीबी की दलदल को स्वीकार नहीं किया और एक सपना देखा “पैसों का पेड़” लगाने का और लगभग 10 साल तक अपने सपने को पूरा करने में लगातार संघर्ष करता रहा इस बीच उसके सामने बहुत सारी समस्याएं भी आयीं लेकिन उनसे पार पाते हुए वह लगातार आगे बढ़ता रहा और एक दिन वह एक उद्योगपति बन गया।

बंटी का दोस्त शंटी, जिसने बचपन में उसका मजाक उड़ाया था आज वह उसी के कंपनी में उसका नौकर है और उसके गाँव वाले जो उसे पागल कह रहे थे वह भी उसकी चापलूसी करते नहीं थकते।खैर कुछ भी हो एक बात तो है कि अगर इंसान कुछ सोच ले और उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगा दे तो उसे एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है जैसे बंटी को मिला और उसने अपने सपने को सच करते हुए एक बड़ा साम्राज्य स्थापित किया जिसे इस कहानी के अनुसार “पैसों का पेड़” कहते हैं।

Motivational Story In Hindi | बंटी-शंटी और पैसों का पेड़

अंतत :

दोस्तों, वैसे तो यह कहानी मेरी कल्पना की उपज है, कई दिनों के कड़े चिंतन और मंथन के बाद मै यह कहानी अपने वेबसाइट के माध्यम से आप लोगों तक पहुंचा पा रहा हूँ लेकिन वाकई में ऐसे ही लोग सफल और अमीर बनते हैं। मैंने दुनियाँ के तीन सौ अरबपतियों की जीवनी पढ़ी है जिससे यह निचोड़ पैदा हुआ कि इसी तरह ही लोग सफल और अमीर बनते हैं। तो सोच क्या रहे हैं आज ही अपने दिमाग में “पैसों के पेड़” की कल्पना करें ताकि आप भी भविष्य में कोई “पैसों का पेड़” खड़ा कर सकें और आपकी कई पीढ़ियाँ उस पेड़ की छत्रछाया के नीचे खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए आपके गुणगान गाते रहें। ऐसा करने से आप के इस दुनियाँ से जाने के बाद भी वह पेड़ लोगों में आपकी उपस्थिति दर्ज कराती रहेगी अर्थात आपको अमर कर देगी।

आशा करता हूँ, कि यह कहानी आपको पसंद आयी होगी और अगर नहीं तो क्यों नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करें और अगर आपके पास कोई सलाह हो तो हमें अवश्य भेजें क्योकि आपका कोई भी सलाह हमारे किये बहुत ही महत्वपूर्ण होगा जैसे आप हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।

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मै एक बार फिर कहना चाहूंगा, कि आप हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं इसलिए अपना बहुत-बहुत खयाल रखियेगा…..अगले कहानी में हमारी फिर मुलाकात होगी…..तब तक के लिए………..

Thanking You / धन्यवाद / शुक्रिया / मेहरबानी………………जय हिन्द जय भारत………………..

आपका दोस्त / शुभचिंतक : अमित दुबे ए मोटिवेशनल स्पीकर Founder & CEO motivemantra.com

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