Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

एक गाँव में चंगू-मंगू नाम के दो दोस्त रहा करते थे, वह दोनों बेरोजगार थे। उनके पास कोई काम धंधा नहीं था इसलिये वे बड़े परेशान रहते थे काफी दिनों तक बेरोजगारी झेलने के बाद आखिरकार उन्हें एक काम मिल ही गया। आखिर क्या है वह काम जिसे दोनों ने करना शुरू किया और उनमे से एक ने बिछा दी पैसों की पाईप लाइन तो आइये पढ़ते हैं यह आर्टिकल ” Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन” और जानते हैं सब कुछ।

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Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

वह जिस गाँव में रहते थे वहाँ पानी की बड़ी समस्या थी, उस गाँव के लोगों को पानी लेने के लिये काफी दूर नदी पर जाना पड़ता था वहाँ से मटके और बाल्टी में पानी भरके लोग लाते थे और अपने पानी की जरूरत को पूरा करते थे।

उस गाँव में ऐसे बहुत से घर थे, जो नदी तक जाकर पानी लाने में दिक्कत महसूस करते थे। इस दिक्कत को समझते हुये गाँव के बनिया ने इसे कमाने का अवसर मानते हुये एक प्लान बनाया कि क्यूं ना अपने दुकान के सामान के साथ-साथ लोगों को पानी भी बेचा जाये।

गाँव के बनिये ने एक ठेला रिक्शा खरीदा, और ढेर सारी गैलन जिससे नदी से गाँव तक पानी लाकर उसे बेचा जा सके और उसी काम के लिये उसने चंगू और मंगू को अपने यहाँ नौकरी पर रखा इसके लिये वह उन दोनों को 10-10 रूपये प्रति चक्कर देता था वे दोनों दिन भर काम करते और लगभग दिन में 5 चक्कर लगाते इससे वे दोनों 50-50 रूपये रोजाना का कमाने लगे।

एक दिन चंगू के दिमाग में एक सवाल पनपा, कि एक चक्कर मे वह 10 गैलन पानी लाते हैं और हर एक गैलन में 35 लीटर पानी होता है और बनियाँ उसे 10 रूपये प्रति गैलन के हिसाब से लोगों को बेचता है।

जब चंगू ने सारा हिसाब फैलाया, तो वह दंग रह गया कि एक रिक्शा में 10 गैलन तो 5 रिक्शा में 50 गैलन यानि 10 रूपये प्रति गैलन के हिसाब से बनियाँ वह पानी लोगों में 500 रूपये में बेचता है और मूझे और मंगू को मिलाकर वह सिर्फ 100 रूपये ही देता है यानि 400 रूपये प्रतिदिन वह कमाता है।

अब चंगू ने दिमाग लगाना शुरू किया,, और एक दिन बाजार जाकर रिक्शे और गैलन का दाम पता किया तो 2000 का एक रिक्शा और 500 रूपये के 10 गैलन मिल जायेगा उसे पता चला अब उसके दिमाग का ढक्कन खुल गया था और वह कुछ नया करने की सोचने लगा।

दोस्तों जिस दिन इंसान के दिमाग का ढक्कन खुल जाता है, उसी दिन से उसके किश्मत का दरवाजा भी खुलने लगता है। अब चंगू के रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो चुका था कि इस तरह गधों के तरह काम करने से हम जिन्दगी भर गधे ही रह जायेंगे सिर्फ 2500 रूपये लगाकर बनियाँ 12000 रूपये महीना कमा रहा है और हम दोनों गधे की तरह दिन भर काम करके सिर्फ 1500-1500 रूपये महीना कमा पाते हैं नहीं अब तो कुछ न कुछ करना पड़ेगा नहीं तो हम जिन्दगी भर गधे ही रह जायेंगे।

पूरी रात चंगू को नींद नहीं आई, और सुबह होते ही वह जैसे ही मंगू से मिलता है इसी बात पर चर्चा करता है इस पर मंगू बड़ी जोर से ठहाके लगाकर हँसता है और कहता है कि मित्र चंगू सोचने और करने में बहुत फर्क होता है अगर ऐसे ही सब लोग आसानी से हर काम कर लें तो हर आदमी अमीर हो जाएगा लेकिन यह सब इतना आसान नहीं होता हम गरीब लोग हैं और गरीबी हमें विरासत में मिली है चल छोड़ सपने देखना बंद कर और रिक्शा और गैलन उठा नदी पर चलते हैं पानी भरने यही हमारी जिंदगी है।

मंगू की ये बातें चंगू को थोड़ा निराश तो करती हैं, लेकिन चंगू की बेचैनी कम नहीं हो रही थी और उसके दिमाग में एक हरकत सी होने लगी थी, वैसे भी एक पुरानी कहावत है कि “जहाँ हरकत होगी वहीं बरकत होगी” चंगू और मंगू नदी पर जाते हैं और पानी भरके लाते हैं शाम हो जाती है और बनियाँ उन दोनों को 50 – 50 रूपये देता है और वे वापिस अपने घर को चल पड़ते हैं।

यहाँ पर एक बात की जिक्र मै करना चाहूंगा, कि चंगू और मंगू दोनों शाम को अपनी दिहाड़ी पाते ही ठेके की तरफ जाते थे और अपने-अपने कोटे की एक-एक शराब की थैली खरीदते थे साथ ही नमकीन और बीड़ी का बंडल भी, इन सब में उनके प्रतिदिन 20-20 रूपये खर्च हो जाते थे और जब वे अपने घर पर पहुँचते थे तब उनके पास 30-30 रूपये बचते थे जो वे अपने घर पर दे देते थे।

लेकिन उस दिन कुछ अलग ही हुआ, जैसे ही मंगू ने रास्ते में पड़ने वाले ठेके के सामने अपनी कदम रोकी चंगू ने उसे शराब खरीदने से रोका और साथ में अपनी सुबह वाली योजना के बारे में बात करनी चाही तो मंगू ने फिर वही राग दोहराई जो उसने सुबह सुनाया था लेकिन चंगू ने उसकी नहीं सुनी और सीधे बगैर शराब ख़रीदे ही अपनी घर की तरफ बढ़ गया, इस पर मंगू को थोड़ा बुरा भी लगा उसने अजीब सा मुंह बनाया और जेब से पैसे निकाले शराब, नमकीन और बीड़ी ख़रीदा और अपने घर की ओर चल दिया।

दोस्तों, जिंदगी की राहों में चलते हुए कभी-कभी हम ऐसे चौराहे पर जाकर खड़े हो जाते हैं, जहाँ हमें एक निर्णय लेना होता है कि आगे जाने के लिए अब हमें कौन सा रास्ता चुनना है और वही समय हमारे भविष्य का निर्माता होता है जिसने सही राह चुन ली वह विकासपुर पहुँच जाता है लेकिन जिसने गलत राह चुन ली वह विनाशपुर पहुँच जाता है।

चंगू और मंगू के जीवन का फैसला भी आज हो गया था, क्योकि चंगू ने विकासपुर वाली रोड पकड़ी और मंगू ने विनाशपुर वाली। दोनों के रास्ते अब अलग-अलग हो गए थे हालाँकि अभी भी दोनों एक साथ ही काम कर रहे थे लेकिन पहले वाली बात अब नहीं रह गयी थी क्योंकि शाम होते ही जैसे ही उनको उनकी दिहाड़ी मिलती चंगू सीधे अपने घर की राह पकड़ता और मंगू मधुशाला की ओर कदम बढ़ाता।

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Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

समय बीतता गया और लगभग 6 महीने बाद अचानक एक चौंकाने वाली बात होती है, दिन भर काम करने के बाद जैसे ही दोनों को अपनी-अपनी दिहाड़ी मिलती है चंगू अपने मालिक अर्थात बनिए से कहता है कि मै कल से काम पर नहीं आऊंगा इस पर जब बनिया उससे पूछता है आखिर क्यों तब वह जबाब देता है कि मै अब अपना ही काम शुरू करने जा रहा हूँ।

यह सुनते ही बनियाँ बड़ी जोर से हँसता है, और कहता है कि काफ़ी समझदार हो गया है रे तू अपना काम करेगा, क्या करेगा ज़रा मुझे भी बता दे इस पर चंगू बताता है कि वह यही पानी का ही व्यवसाय करेगा लेकिन किसी की नौकरी नहीं बल्कि अपना रिक्शा और गैलन होगा जिसमे नदी से पानी लाकर लोगों के घर-घर पहुँचाऊँगा, बहुत कर चुका नौकरी अब किसी की गुलामी नहीं करूँगा। यह कहते हुए चंगू वहाँ से चला जाता है।

दोस्तों, अब आपके दिमाग में एक सवाल पनप सकता है, कि चंगू कैसे अपना पानी का काम शुरू करेगा क्योंकि उसके लिए तो पैसों की जरुरत पड़ेगी क्योंकि बगैर ठेले रिक्शा और गैलन के वह अपना काम कैसे शुरू कर सकता है अब इसके लिए हम 6 महीने पीछे चलते हैं।

जिस दिन शराब के ठेके के सामने उसने मंगू से नशे का रिस्ता तोड़ा था, उसके दूसरे दिन ही वह एक गुल्लक खरीदता है और प्रतिदिन उसमें वही 20 रूपये जिससे वह शराब की थैली, नमकीन और बीड़ी खरीदता था अब वह यह सब न करके अपने भविष्य को सवाँरने के लिए गुल्लक में डालने लगा और ठीक 6 महीने बाद जब वह अपने गुल्लक को तोड़ता है तो उसमे 3600 से कुछ ज्यादा ही रूपये इकट्ठे हो चुके थे।

दोस्तों, अब जब चंगू वह रूपये अपने हाथों में देखता है, तो उसके आँखों के सामने एक तस्वीर घूमने लगती है और वह तस्वीर थी उसका खुद का पानी की सप्लाई का व्यवसाय और ठीक उसके दूसरे दिन ही वह नौकरी से इस्तीफा दे देता है और मार्किट जाकर एक ठेला रिक्शा और 10 गैलन खरीद कर लाता है और गाँव के ही एक लड़के को अपने साथ नौकरी पर रख लेता है और नदी से पानी लेकर गाँव में सप्लाई देने लगता है।

अब यहाँ पर शायद आप यह सोच रहे होंगे, कि चंगू ने ऐसा कौन सा कद्दू में तीर मार दिया आखिर वह एक ठेले पर पानी ही तो सप्लाई कर रहा है उसने कोई बहुत बड़ा वाटर प्लांट थोड़े ही लगा लिया, तो दोस्तों यहाँ पर मै आपको यह बताना चाहूंगा कि धंधा कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि उसे करने का तरीका उसे छोटा या बड़ा बनाता है। वैसे भी पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त :

अभी तो आगाज़ है अंजाम आना बाकी है। मेहनत और समझदारी वाला ईनाम पाना बाकी है।।

समय बीतता गया और चंगु का पानी का व्यवसाय अच्छा चलने लगा, अब उसके पास कई ठेले रिक्शे और बहुत सारे गैलन साथ में उसी हिसाब से सप्लाई करने वाले लड़के भी थे उसने एक स्कूटर भी खरीद लिया था जिस पर घूम कर वह गाँव-गाँव पानी खरीदने वाले लोगों से संपर्क किया करता और उनके यहाँ तक पानी की सप्लाई भिजवाता था।

कहते हैं कि जब इंसान के पास पैसा आ जाता है, तो उसका दिमाग भी बहुत तेजी से काम करने लगता है, चंगु के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था, अब वह कुछ दूर की सोचने लगा था बल्कि कुछ दूर की ही नहीं, बहुत दूर की और उसकी दूरदृष्टि का नतीजा यह निकला कि उसने बड़े पैमाने पर नदी से लेकर अपने गाँव तक के बीच में खुदाई करवाना चालु कर दिया हालाँकि इस खुदाई के रास्ते में बहुत साड़ी रुकावटें भी आई लेकिन चंगू ने धीरे-धीरे सब कुछ संभाल लिया और नदी से लेकर अपने गाँव तक पानी की पाईप लाइन बिछवा दी और लोग देखते ही रह गए।

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Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

Motivational Story In Hindi | चंगू-मंगू और पैसों की पाईप लाइन

चंगू ने अपने घर के सामने पानी की विक्री का फार्मूला अपनाया, और एक बाल्टी पानी की कीमत 5 रूपये रखी और देखते ही देखते उसके घर के सामने लोगों की भीड़ इकट्ठी होने लगी क्योंकि जो पानी की बाल्टी पहले 10 रूपये की थी वही अब महज 5 रूपये की मिलने लगी।

चंगू ने अपने इस फार्मूले को सफल देख इसका विस्तार करने का प्लान बनाया, और दूर दराज के बहुत सारे गाँवों तक अपनी पाईप लाइन का जाल बिछा दिया और हर एक गाँव में एक वाटर सेंटर बनाकर वहाँ पर एक आदमी बिठा दिया जो पैसे लेकर पानी देने लगा।

एक दिन की बात है चंगू अपने गाँव के वाटर सप्लाई सेंटर पर बैठा हुआ था, तभी एक आदमी जिसकी दाढ़ी बहुत बढ़ी हुई थी आकर चंगु के सामने खड़ा हो जाता है और रोने लगता है। जब चंगू ने गौर से देखा तो वह मंगू था उसने मंगू से उसके बारे में पूछा तब मंगू ने अपनी आप बीती बताई कि बनिए ने मुझसे पूरी जिंदगी नौकरी करवाई अब जब मै शारीरिक रूप से कमजोर और बीमार हो गया तो उसने मुझे नौकरी से निकाल दिया अब इस उम्र में मुझे भला कौन नौकरी देगा।

मंगू की दर्द भरी दास्ताँ सुनकर चंगू को उस पर दया आ जाती है, और वह उसे अपने वाटर सेंटर पर नौकरी दे देता है जिस पर मंगू का काम है कि वह लोगों से पैसे लेकर उन्हें पानी देता है। अब सोचने की बात यह है कि जो चंगू और मंगू आज से 10 साल पहले एक ही साथ एक ही बनियें के यहाँ नौकरी करते थे आज उन दोनों की औकात में कितना फर्क है। चंगू मालिक है और मंगू नौकर।

चंगू और मंगू के औकात में आज जो फर्क है उसका बीज 10 साल पहले बोया गया था, जैसे –

  • चंगू के दिमाग में हरकत होना साथ ही अपने और बनियें की कमाई का हिसाब लगाना।
  • चंगू द्वारा यह सोचना कि कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा नहीं तो हम जिंदगी भर गधे ही रह जाएंगे।
  • चंगु का एक फैसला कि आज से वह शराब नहीं पियेगा बल्कि उसी पैसे को अपने भविष्य के लिए निवेश करेगा।
  • चंगू द्वारा गुल्लक खरीदना और उसमे प्रतिदिन 20 रूपये जमा करना और 6 महीने बाद उस पैसे से ठेली रिक्शा और गैलन खरीदना।
  • चंगू द्वारा पानी का व्यवसाय शुरू करके उसी में पूरी तरह से रम जाना और कड़ी परिश्रम के साथ-साथ दिमाग लगाना।

दोस्तों, हमारे जीवन में उठाये गए छोटे-छोटे कदम हमें कहीं का कहीं पहुंचा देते हैं, अब चंगु को ही देख लीजिये उसने कोई बहुत बड़ा कदम नहीं उठाया था कदम तो छोटे-छोटे ही थे लेकिन उनमे गति थी, निरंतरता थी और अपने खुद के प्रति वचनवद्धता थी जिसका परिणाम यह निकला कि उसने पैसों की एक ऐसी पाईप लाइन बिछा दी जो अब जिंदगी भर उसे और उसके आने वाली कई पीढ़ियों को पानी देता रहेगा और वे उसी पानी को बेच कर अपनी जिंदगी ऐसो-आराम से काटेंगे और दूसरी तरफ मंगू के जो हालात हैं वो आप देख ही रहे हैं।

मंगू ने ना ही कुछ सोचा, ना ही कुछ किया, बस जिंदगी नामक गोलचक्कर पर घूमता रहा और सीधी सी बात है कि गोलचक्कर पर घूमने वाला जहाँ से चलता है दुबारा वहीँ पर पहुँच जाता है इसलिए गोलचक्कर से आगे निकलें और कोई भी एक रास्ता पकड़ें ताकि आप कहीं तो पहुँच सकें।

जैसे एक-एक ईंट से एक भव्य ईमारत तैयार हो जाती है, उसी तरह छोटे-छोटे कदम एक दिन हमें हमारे मंज़िल तक पहुँचा देते हैं लेकिन इसके लिए आपको एक शुरुआत तो करनी पड़ेगी क्योंकि शुरुआत ही किसी भी मंज़िल को पाने का सबसे पहला कदम होता है।

जिंदगी आपकी है, आप ही इसके मालिक हैं, सोचें समझें और विचार करें, क्या पता आपकी आज की एक सोच और उस सोच से प्रभावित कोई राह आपको भी चंगू की तरह पैसों की पाईप लाइन बनाने की राह पर ले जाए और आज से 10 साल बाद आप भी एक बहुत बड़े व्यवसायी या उद्योगपति के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आ जाएँ।

दोस्तों, हालाँकि यह कहानी मेरी कल्पना की उपज है, लेकिन यकीन मानिये इसी तरह के कदम उठा कर और उसपे चलते-चलते एक दिन कोई भी इंसान एक बहुत बड़ा साम्राज्य स्थापित कर सकता है। मैंने सैकड़ों अरबपतियों की बायोग्राफियों को जब पढ़ा तो पाया कि ज्यादातर अरबपति कभी ना कभी बहुत ही छोटे कद के थे लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ने एक बहुत बड़ा साम्राज्य स्थापित किया।

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